₹1 से शुरू हुई क्रांति: सैम पित्रोदा की कहानी – ओडिशा के एक छोटे से गाँव से निकलकर अमेरिका तक का सफर तय करने वाले सैम पित्रोदा ने आरामदायक जीवन और सफलता हासिल की। लेकिन उनका असली सपना भारत की सेवा करना था। राजीव गांधी ने जब उन्हें भारत की तकनीकी दिशा बदलने का प्रस्ताव दिया, तो पित्रोदा ने मात्र ₹1 के प्रतीकात्मक वेतन पर काम करने का निर्णय लिया। उन्होंने हाल ही में यूट्यूब चैनल Young Indian in Politics पर श्रेया राजपूत को दिए इंटरव्यू में बताया कि उनके लिए असली इनाम राष्ट्र निर्माण था, धन नहीं। तकनीक का मानवीय दृष्टिकोण इंटरव्यू के 38वें मिनट पर उन्होंने कहा कि तकनीक केवल उपकरणों की बात नहीं है, बल्कि यह मानव समस्याओं का समाधान है। - गाँवों को दूरसंचार से जोड़ना - बच्चों को टीकाकरण दिलाना - साक्षरता फैलाना उनके अनुसार असली क्रांति मानव क्षमता का निर्माण है। युवाओं पर भरोसा 48 से 52 मिनट के बीच उन्होंने युवाओं को स्थानीय स्तर पर समस्याएँ हल करने की प्रेरणा दी। उनका मानना है कि भारत का भविष्य त...
करनाल, हरियाणा — 1 मई 2026: किसान कांग्रेस सोशल मीडिया हरियाणा के राज्य संयोजक परमिंदर सिंह भाम्बा ने श्रम दिवस के अवसर पर एक विशेष वीडियो संदेश जारी किया। यह संदेश उन्होंने यूट्यूब और फेसबुक पर साझा किया, जिसमें उन्होंने देश की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर गंभीर चिंताएँ व्यक्त कीं। हर नागरिक बना ‘मजदूर’ भाम्बा ने कहा कि आज भारत का हर नागरिक एक तरह से ‘मजदूर’ बन गया है। उनका तर्क था कि वेतनभोगी वर्ग भी अब उसी श्रेणी में आ गया है क्योंकि आमदनी जीवन यापन की बढ़ती लागत को पूरा नहीं कर पा रही है। अतीत की तुलना वर्तमान से अपने संदेश में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल को याद किया। उस समय भारत को एक उभरती हुई शक्ति के रूप में देखा जाता था और आम आदमी के लिए हवाई यात्रा जैसे सपने सच हो रहे थे। भाम्बा ने कहा कि आज वह दौर कहीं पीछे छूट गया है। मीडिया पर तीखा प्रहार भाम्बा ने मुख्यधारा के मीडिया को ‘गोदी मीडिया’ करार देते हुए आरोप लगाया कि यह सत्ता के दबाव में काम कर रहा है और असली मुद्दों को सामने नहीं ...