देश में पेट्रोल और डीज़ल की लगातार बढ़ती कीमतें तथा गैस की कमी आम जनता के लिए गंभीर संकट बन चुकी हैं। रोज़मर्रा की ज़िंदगी प्रभावित हो रही है और महंगाई का बोझ सीधे जनता की जेब पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सुझावों से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सरकार को ठोस विकल्प और नीतिगत कदम उठाने होंगे। इस संकट के बीच लोगों को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की याद आ रही है, जिन्होंने वैश्विक आर्थिक मंदी के समय भारत को सुरक्षित रखा था और उसके असर को देश पर हावी नहीं होने दिया था। जनता का सवाल है कि क्या वर्तमान सरकार के पास कोई सक्षम अर्थशास्त्री या नीतिवान नहीं है, जो इस अनचाहे संकट से देश को बाहर निकाल सके। भगवंत सिंह भंबा, पूर्व चेयरमैन का बयान: "प्रधानमंत्री जी को केवल सुझावों पर नहीं, बल्कि विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए। काश मोदी जी अमेरिका के आगे झुकने और ईरान को 'फादर नेशन' कहने से पहले अपने देश की जनता के बारे में सोचते। अगर पुराने दोस्त रूस और ईरान को नज़रअंदाज़ न किया होता, तो आज इस संकट की नौबत ही न आती।"
पटना, 17 मई: बिहार में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ बच्चों को गंगा नदी में दुर्लभ और संरक्षित प्रजाति गंगेटिक डॉल्फ़िन के साथ खेलते हुए देखा गया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों में गहरा आक्रोश फैल गया। गंगेटिक डॉल्फ़िन भारत की राष्ट्रीय जलीय जीव है और इसे एंडेंजर्ड स्पीशीज़ की श्रेणी में रखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की घटनाएँ न केवल डॉल्फ़िन के जीवन के लिए खतरनाक हैं, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण कानूनों का भी उल्लंघन है। स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वन विभाग ने कहा है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि गंगा डॉल्फ़िन को छूना या परेशान करना कानूनन अपराध है। पर्यावरणविदों ने सरकार से अपील की है कि गंगा किनारे रहने वाले लोगों को जागरूक किया जाए और बच्चों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित किया जाए। उनका कहना है कि यदि इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो गंगेटिक डॉल्फ़िन की संख्या ...