स्टेट और हिसार विजिलेंस टीम ने पंचकूला सेक्टर-6 हरियाणा मंडी बोर्ड की एक महिला आर्किटेक्ट को बुधवार शाम करीब साढ़े 5 बजे रिश्वत लेने के मामले में हिरासत में लिया है। विजिलेंस को सूचना मिली थी कि महिला आर्किटेक्ट ने हिसार मंडी बोर्ड में शेड डालने के नाम पर ठेकेदार से डेढ़ लाख रुपये रिश्वत मांगी है। विजिलेंस के मुताबिक इस मामले में महिला आर्किटेक्ट पहले भी दो लाख रुपये रिश्वत ले चुकी थी। अब उसके पास शेड की अप्रूवल की फाइल आई थी और इसके लिए रिश्वत मांगी थी।सूचना मिलने पर आर्किटेक्ट और तीन व्यक्ति के फोन को विजिलेंस ने करीब दो दिन तक सर्विलांस पर लगाया। इस दौरान महिला आर्किटेक्ट और दूसरी पार्टी के बीच की हुई बात और मिलने की प्लानिंग के बारे में विजिलेंस की टीम को पूरी जानकारी थी। विजिलेंस की टीम ने महिला आर्किटेक्ट को करीब डेढ़ लाख रुपये रिश्वत देने जा रहे हिसार के हांसी के रहने वाले संजय, दीपक और अनिल पर नजर रखी हुई थी। बुधवार की शाम महिला आर्किटेक्ट ने उनको फोन करके कुछ देर से आने की बात कही।करीब पांच बजे हांसी से आए तीनों में से दो व्यक्ति महिला आर्किटेक्ट को रिश्वत देने के लिए उसके केबिन में घुसे। तभी विजिलेंस की टीम भी केबिन में घुस गई। हालांकि उस समय तक महिला ने पैसा अपने हाथ में नहीं लिया था फिर भी फोन रिकॉर्डिंग के आधार पर स्टेट विजिलेंस की टीम ने पैसा देने पहुंचे दोनों व्यक्तियों और महिला आर्किटेक्ट को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही महिला आर्किटेक्ट के केबिन से कुछ कागजात भी अपने कब्जे में लिए। उससे अभी पूछताछ जारी है। डीएसपी विजिलेंस अजीत सिंह ने बताया कि हांसी में मार्केटिंग बोर्ड की ओर से शेड डालना था और उसकी फाइल महिला आर्किटेक्ट के पास अप्रूवल के लिए आई थी। इस फाइल को अप्रूव करने के बदले डेढ़ लाख रुपये रिश्वत मांगी गई थी।
चंडीगढ़/करनाल, 23 नवम्बर: केंद्र सरकार द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने वाले संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2025 को लेकर पंजाब और हरियाणा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस विधेयक के तहत चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 में शामिल कर सीधे राष्ट्रपति के अधीन किया जाएगा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व चेयरमैन भगवंत सिंह भांबा ने इस कदम को पंजाब और हरियाणा के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। भांबा ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब की भूमि पर बसाया गया था और 1966 में हरियाणा के गठन के बाद इसे दोनों राज्यों की साझा राजधानी के रूप में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह संशोधन पंजाब और हरियाणा की ऐतिहासिक दावेदारी को खत्म कर देगा और चंडीगढ़ को पूरी तरह केंद्र के अधीन कर देगा। उन्होंने कहा, “यह विधेयक संघीय ढाँचे पर सीधा प्रहार है। पंजाब और हरियाणा की जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। चंडीगढ़ हमारी पहचान और अधिकार का प्रतीक है, इसे दिल्ली की सत्ता के हवाले करना विश्वासघात है।” भांबा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्द...
Comments
Post a Comment