ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। हाल ही में हुए प्रदर्शनों में अब तक लगभग 32,000 लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट सामने आई है। यह आंकड़ा देश के भीतर गहराते असंतोष और सरकार के खिलाफ बढ़ते जनाक्रोश को दर्शाता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे राजनीतिक स्वतंत्रता, आर्थिक सुधार और सामाजिक न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार इन आंदोलनों को कठोर दमन के जरिए दबाने की कोशिश कर रही है।
इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि उसके पास परमाणु समझौते तक पहुँचने के लिए केवल 10 से 15 दिन का समय है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान इस अवधि में कोई ठोस कदम नहीं उठाता, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की ओर से कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
क्षेत्रीय परिदृश्य भी तेजी से बदल रहा है। खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियाँ बढ़ गई हैं और कई देशों ने अपनी सेनाओं को उच्च सतर्कता पर रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व पर पड़ेगा और ऊर्जा आपूर्ति से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पर गंभीर प्रभाव देखने को मिल सकता है।
ईरान की स्थिति अब केवल घरेलू संकट नहीं रही, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या ईरान सरकार जनता की मांगों को स्वीकार कर सुधार की दिशा में कदम उठाती है या फिर यह संघर्ष और अधिक हिंसक रूप लेता है।

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