करनाल में बैसाखी के अवसर पर आयोजित कांग्रेस कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता सरदार गुरदीप सिंह सप्पल ने ऐतिहासिक घटनाओं और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानी ने देश में आज़ादी की लहर पैदा की और कांग्रेस के कराची अधिवेशन को नई दिशा दी।
सप्पल ने बताया कि भगत सिंह के पिता सरदार किशन सिंह ने कांग्रेस मंच से कार्यकर्ताओं और देशवासियों से अपील की थी कि स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए गांधी जी के नेतृत्व में लामबंद हों। उन्होंने इसे कांग्रेस, गांधी और भगत सिंह के बीच गहरे संबंध का प्रतीक बताया।
अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस ने अपने शुरुआती वर्षों में जलियांवाला नरसंहार, भगत सिंह की शहादत और नागरिक अधिकारों पर कोई समर्थन नहीं दिया, जबकि कांग्रेस ने कराची अधिवेशन में नागरिक अधिकारों का प्रस्ताव पारित कर संविधान की नींव रखी। सप्पल ने इस संदर्भ में संविधान की रक्षा को आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।
कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जनता से अपील की कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की रक्षा के लिए एकजुट हों।

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