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राज्य सरकार ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं

 


केरल के त्रिशूर ज़िले में स्थित एक आतिशबाज़ी निर्माण इकाई में 20 अप्रैल 2026 को भीषण विस्फोट हुआ, जिसमें कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब फैक्ट्री में त्रिशूर पूरम महोत्सव के लिए आतिशबाज़ी तैयार की जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट इतना तेज़ था कि लोगों को भागने के लिए केवल तीन सेकंड का समय मिला। आसपास के घरों और दुकानों की खिड़कियाँ टूट गईं और कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।  


स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का पालन ठीक से नहीं किया गया था और अत्यधिक मात्रा में विस्फोटक सामग्री जमा की गई थी। इस घटना ने आतिशबाज़ी उद्योग में सुरक्षा नियमों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।  


राज्य सरकार ने हादसे की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं और मृतकों के परिजनों को मुआवज़ा देने की घोषणा की है। वहीं विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने सुरक्षा मानकों की निगरानी में लापरवाही बरती, जिसके कारण यह त्रासदी हुई। इस हादसे ने न केवल स्थानीय समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है बल्कि पूरे देश में आतिशबाज़ी निर्माण इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है।  


यह घटना त्योहारों के दौरान आतिशबाज़ी के उपयोग और निर्माण से जुड़े जोखिमों को उजागर करती है और यह सवाल उठाती है कि क्या सांस्कृतिक परंपराओं के नाम पर लोगों की जान को खतरे में डालना उचित है।

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