हंगरी की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 16 वर्षों से सत्ता में रहे प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बान ने अप्रत्याशित हार स्वीकार कर ली है। विपक्षी नेता पीटर मगार ने भारी बहुमत से जीत दर्ज की और इसे "हंगरी की यूरोप में वापसी" बताया जा रहा है। इस परिणाम को यूरोपीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि ऑर्बान लंबे समय से यूरोपीय संघ की नीतियों से टकराव में रहे थे। अब नए नेतृत्व के साथ हंगरी के यूरोप के साथ संबंधों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
चंडीगढ़/करनाल, 23 नवम्बर: केंद्र सरकार द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने वाले संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2025 को लेकर पंजाब और हरियाणा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस विधेयक के तहत चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 में शामिल कर सीधे राष्ट्रपति के अधीन किया जाएगा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व चेयरमैन भगवंत सिंह भांबा ने इस कदम को पंजाब और हरियाणा के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। भांबा ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब की भूमि पर बसाया गया था और 1966 में हरियाणा के गठन के बाद इसे दोनों राज्यों की साझा राजधानी के रूप में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह संशोधन पंजाब और हरियाणा की ऐतिहासिक दावेदारी को खत्म कर देगा और चंडीगढ़ को पूरी तरह केंद्र के अधीन कर देगा। उन्होंने कहा, “यह विधेयक संघीय ढाँचे पर सीधा प्रहार है। पंजाब और हरियाणा की जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। चंडीगढ़ हमारी पहचान और अधिकार का प्रतीक है, इसे दिल्ली की सत्ता के हवाले करना विश्वासघात है।” भांबा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्द...

Comments
Post a Comment