Skip to main content

यूट्यूब चैनल Young Indian in Politics पर दूरसंचार के जनक सम पित्रोदा



 यूट्यूब चैनल Young Indian in Politics पर दूरसंचार के जनक सम पित्रोदा ने एक गहन और बेबाक बातचीत में आधुनिक भारत और विश्व की चुनौतियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने तकनीक, शासन, विविधता और नैतिक नेतृत्व जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। पित्रोदा ने ज़ोर दिया कि एआई केवल डेटा नहीं बल्कि उपयोगी ज्ञान प्रदान करे, और युवाओं से आग्रह किया कि वे एआई युग में “स्वयं-शिक्षार्थी” बनें। उन्होंने चेतावनी दी कि पश्चिमी मॉडलों पर अत्यधिक निर्भरता से बचना होगा और इसके लिए स्थानीय भारतीय डेटा सेट्स की आवश्यकता है।  


भारत की विविधता को उन्होंने नवाचार की उपजाऊ ज़मीन बताया और परिवारिक मूल्यों को सुरक्षा व उद्देश्य का आधार माना। उन्होंने दलितों, अल्पसंख्यकों और हाशिए पर खड़े समुदायों के सम्मान और समानता के लिए कट्टर समावेशन की वकालत की। शासन व्यवस्था पर बोलते हुए उन्होंने नौकरशाही की बाधाओं की आलोचना की और तीन स्तंभों पर आधारित विज़न प्रस्तुत किया—ज़िला स्तर पर विकेंद्रीकरण, सभी सामाजिक समूहों का समावेशन और उपभोग से अधिक संरक्षण द्वारा स्थिरता।  


वैश्विक नेतृत्व पर चर्चा करते हुए पित्रोदा ने राजनीतिक विमर्श में विश्वसनीयता के क्षरण पर चिंता जताई और नैतिक, वैचारिक नेतृत्व की वापसी की मांग की। उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक सम्मान पाने के लिए पहले अपने घर में मूल्यों को प्रदर्शित करना होगा। युवाओं के लिए उनका संदेश स्पष्ट था—छोटे से शुरू करें, चरित्र निर्माण करें, मेहनत और शिक्षा पर ध्यान दें; अनुशासन, विश्लेषण, सम्मान और नैतिकता को जीवन का आधार बनाएं; और राष्ट्र-निर्माण की शुरुआत अपने मोहल्ले से करें।  



Comments

Popular posts from this blog

चंडीगढ़ पर केंद्र का कब्ज़ा, पंजाब-हरियाणा के अधिकारों पर सीधा हमला: कांग्रेस नेता भगवंत सिंह भांबा

  चंडीगढ़/करनाल, 23 नवम्बर:   केंद्र सरकार द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने वाले संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2025 को लेकर पंजाब और हरियाणा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस विधेयक के तहत चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 में शामिल कर सीधे राष्ट्रपति के अधीन किया जाएगा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व चेयरमैन भगवंत सिंह भांबा ने इस कदम को पंजाब और हरियाणा के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है।   भांबा ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब की भूमि पर बसाया गया था और 1966 में हरियाणा के गठन के बाद इसे दोनों राज्यों की साझा राजधानी के रूप में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह संशोधन पंजाब और हरियाणा की ऐतिहासिक दावेदारी को खत्म कर देगा और चंडीगढ़ को पूरी तरह केंद्र के अधीन कर देगा।   उन्होंने कहा, “यह विधेयक संघीय ढाँचे पर सीधा प्रहार है। पंजाब और हरियाणा की जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। चंडीगढ़ हमारी पहचान और अधिकार का प्रतीक है, इसे दिल्ली की सत्ता के हवाले करना विश्वासघात है।”   भांबा ने  कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्द...

गुरु नानक दरबार, भंभा कॉलोनी निसिंग में श्रद्धा और सेवा के साथ मनाया गया गुरु नानक देव जी का पावन प्रकट दिवस

गुरु नानक दरबार, भंभा कॉलोनी निसिंग में श्रद्धा और सेवा के साथ मनाया गया गुरु नानक देव जी का पावन प्रकट दिवस निसिंग, 5 नवम्बर —  गुरु नानक देव जी महाराज का पावन प्रकट दिवस इस वर्ष भी गुरु नानक दरबार, भंभा कॉलोनी निसिंग में बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया गया। स्थानीय श्रद्धालुओं और सेवादारों ने मिलकर पूरे आयोजन को सेवा, समर्पण और भाईचारे की मिसाल बना दिया। सेवादारों ने श्रद्धा भाव से चाय-पकौड़ों की सेवा की और गुरु का लंगर चलाया, जिसे गुरु की प्यारी संगत ने श्रद्धा पूर्वक ग्रहण किया। निसिंग और आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों ने बिना किसी धार्मिक भेदभाव के गुरु घर में हाज़िरी भरी और गुरु साहिब के उपदेशों को अपने मन में बसाया। मुख्य सेवादार भगवंत सिंह भंभा, अमर सिंह, पंजाब सिंह आदि ने नौजवान संगत के साथ मिलकर सेवा कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग लिया। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजन में हिस्सा लिया, जिससे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता की भावना जागृत हुई। गुरु नानक देव जी के जीवन और शिक्षाओं को समर्पित यह आयोजन समाज में प्रेम, सम...

पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर पूर्व चेयरमैन भगवंत सिंह भांबा का तीखा बयान: "पंजाबियों की विरासत से खेलने की हिम्मत न करें केंद्र और राज्य सरकारें"

  पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर पूर्व चेयरमैन भगवंत सिंह भांबा का तीखा बयान: "पंजाबियों की विरासत से खेलने की हिम्मत न करें केंद्र और राज्य सरकारें" करनाल , 10 नवम्बर 2025 —  पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर चल रहे विवाद पर पूर्व चेयरमैन भगवंत सिंह भांबा ने छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के समर्थन में एक तीखा और भावनात्मक बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र सरकार और पंजाब सरकार को पंजाबियों की भावनाओं से खेलने की हिम्मत नहीं करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि पंजाबी विरासत को छीनने की किसी भी कोशिश को पंजाब की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी। भांबा ने कहा कि पंजाब, हरियाणा या कोई भी राज्य अपनी यूनिवर्सिटियों और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षक है और उन्हें अपने तरीके से इन्हें सुरक्षित रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने छात्रों और कार्यकर्ताओं द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन को पूरी तरह न्यायोचित बताया और कहा कि यह केवल एक शैक्षणिक संस्थान की रक्षा नहीं, बल्कि पंजाब की आत्मा की रक्षा का संघर्ष है। उनके अनुसार, सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन विरासत स्थायी होती है। पंजाब यूनिव...