पुणे में खेले जा रहे सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी फाइनल में हरियाणा और झारखंड की टीमें आमने-सामने हैं। यह दोनों राज्यों के क्रिकेट इतिहास का एक ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि दोनों ही पहली बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के फाइनल में पहुँचे हैं। खिलाड़ियों और दर्शकों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है, वहीं क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुकाबला युवा प्रतिभाओं के लिए अपनी क्षमता साबित करने का सुनहरा अवसर है। हरियाणा और झारखंड दोनों ही टीमों ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है और अब खिताब जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक रही हैं। इस रोमांचक फाइनल ने घरेलू क्रिकेट जगत में नई ऊर्जा और उम्मीदें जगा दी हैं।
चंडीगढ़/करनाल, 23 नवम्बर: केंद्र सरकार द्वारा संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किए जाने वाले संविधान (131वाँ संशोधन) विधेयक, 2025 को लेकर पंजाब और हरियाणा में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस विधेयक के तहत चंडीगढ़ को संविधान के अनुच्छेद 240 में शामिल कर सीधे राष्ट्रपति के अधीन किया जाएगा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व चेयरमैन भगवंत सिंह भांबा ने इस कदम को पंजाब और हरियाणा के अधिकारों पर सीधा हमला बताया है। भांबा ने कहा कि चंडीगढ़ पंजाब की भूमि पर बसाया गया था और 1966 में हरियाणा के गठन के बाद इसे दोनों राज्यों की साझा राजधानी के रूप में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह संशोधन पंजाब और हरियाणा की ऐतिहासिक दावेदारी को खत्म कर देगा और चंडीगढ़ को पूरी तरह केंद्र के अधीन कर देगा। उन्होंने कहा, “यह विधेयक संघीय ढाँचे पर सीधा प्रहार है। पंजाब और हरियाणा की जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। चंडीगढ़ हमारी पहचान और अधिकार का प्रतीक है, इसे दिल्ली की सत्ता के हवाले करना विश्वासघात है।” भांबा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्द...

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