Skip to main content

मोटोरोला ने CES 2026 में अपने नए फ्लैगशिप स्मार्टफोन ‘Motorola Signature’ को पेश किया है



मोटोरोला सिग्नेचर स्मार्टफोन को खासतौर पर हाई-एंड उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। कंपनी ने घोषणा की है कि भारत में इसका 16GB RAM और 1TB स्टोरेज वाला वेरिएंट उपलब्ध कराया जाएगा, जिसकी संभावित कीमत ₹84,999 होगी।  


इस स्मार्टफोन की सबसे बड़ी खासियत इसका पेरिस्कोप टेलीफोटो लेंस है, जो ज़ूम फोटोग्राफी को नए स्तर पर ले जाएगा। इसके अलावा इसमें प्रीमियम डिज़ाइन, हाई-रेज़ोल्यूशन डिस्प्ले और एडवांस्ड प्रोसेसर दिया गया है, जिससे यह फोन न केवल स्टाइल बल्कि परफॉर्मेंस के मामले में भी बेहतरीन साबित होगा।  


भारत में हाई-एंड स्मार्टफोन बाजार तेजी से बढ़ रहा है और उपभोक्ता प्रीमियम फीचर्स वाले डिवाइस की ओर आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में Motorola Signature का आगमन इस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा को और तीव्र कर देगा।  

Motorola Signature का भारत में लॉन्च टेक्नोलॉजी प्रेमियों के लिए एक बड़ा आकर्षण होगा। इसकी कीमत और फीचर्स इसे प्रीमियम श्रेणी में स्थापित करते हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय बाजार में यह स्मार्टफोन Apple और Samsung जैसे दिग्गजों को कितनी चुनौती दे पाता है।  



Comments

Popular posts from this blog

करनाल में बैसाखी कार्यक्रम – सरदार गुरदीप सिंह सप्पल का संबोधन

करनाल में बैसाखी के अवसर पर आयोजित कांग्रेस कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता सरदार गुरदीप सिंह सप्पल ने ऐतिहासिक घटनाओं और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानी ने देश में आज़ादी की लहर पैदा की और कांग्रेस के कराची अधिवेशन को नई दिशा दी।   सप्पल ने बताया कि भगत सिंह के पिता सरदार किशन सिंह ने कांग्रेस मंच से कार्यकर्ताओं और देशवासियों से अपील की थी कि स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए गांधी जी के नेतृत्व में लामबंद हों। उन्होंने इसे कांग्रेस, गांधी और भगत सिंह के बीच गहरे संबंध का प्रतीक बताया।   अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस ने अपने शुरुआती वर्षों में जलियांवाला नरसंहार, भगत सिंह की शहादत और नागरिक अधिकारों पर कोई समर्थन नहीं दिया, जबकि कांग्रेस ने कराची अधिवेशन में नागरिक अधिकारों का प्रस्ताव पारित कर संविधान की नींव रखी। सप्पल ने इस संदर्भ में संविधान की रक्षा को आज की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।   कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं और कार...

वरिष्ठ पंथक नेता और लेखक सरदार गुरिंदर पाल सिंह धनौला का निधन, 11 दिसंबर 2025 को रात 9 बजे अंतिम सांस ली

वरिष्ठ पंथक नेता और लेखक सरदार गुरिंदर पाल सिंह धनौला का निधन, 11 दिसंबर 2025 को रात 9 बजे अंतिम सांस ली बरनाला, पंजाब – 12 दिसंबर 2025:  पंजाब ने अपना सच्चा पहरेदार खो दिया। वरिष्ठ पंथक नेता, लेखक और समाजसेवी सरदार गुरिंदर पाल सिंह धनौला का 11 दिसंबर 2025 को रात 9 बजे निधन हो गया। उनके निधन से पूरे पंजाब में शोक की लहर दौड़ गई है। धनौला कस्बे से जुड़े इस व्यक्तित्व ने अपना जीवन सिख अधिकारों, न्याय और समाजिक जागरूकता के लिए समर्पित किया।   धनौला जी का राजनीतिक सफर कई दशकों तक फैला रहा। वे शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर), सरब हिंद शिरोमणि अकाली दल और बहुजन समाज पार्टी जैसे दलों से जुड़े रहे। वे SAD (Amritsar) के महासचिव रहे और 2002 में धनौला विधानसभा क्षेत्र से BSP के टिकट पर चुनाव लड़ा। इसके अलावा, 1990 के दशक में उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरजीत सिंह बर्नाला के विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में भी सेवाएं दीं।   राजनीति के साथ-साथ उनकी पहचान एक निर्भीक लेखक के रूप में भी रही। उनके लेख समाज की सच्चाई और सिख मूल्यों की आवाज़ बने। उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों...

मनरेगा खत्म करना करोड़ों परिवारों से रोज़ी-रोटी की गारंटी छीनना है: भगवंत सिंह भांबा

मनरेगा को समाप्त करने की चर्चाओं पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व चेयरमैन भगवंत सिंह भांबा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मनरेगा को खत्म करना देश के करोड़ों परिवारों से रोज़ी-रोटी की गारंटी छीनने जैसा है। भांबा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार की तथाकथित "रोज़गार गारंटी योजना" में वास्तव में किसी भी प्रकार की रोजगार की गारंटी नहीं है।   उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत न केवल रोजगार का भरोसा समाप्त कर दिया गया है, बल्कि करोड़ों लोगों से अपने रोजगार के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने का अधिकार भी छीन लिया गया है। भांबा ने इसे आम जनता के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि मनरेगा जैसी योजनाएं ग्रामीण भारत के लिए जीवनरेखा रही हैं, जिसने कठिन समय में गरीब परिवारों को सहारा दिया।   कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि भाजपा सरकार की नीतियां आम जनता को असुरक्षा और बेरोजगारी की ओर धकेल रही हैं। उन्होंने मांग की कि मनरेगा जैसी योजनाओं को और मज़बूत किया जाए ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का संकट न बढ़े। भांबा ने कहा कि यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका और सम्मान स...